वीओआई- वॉइस ऑफ इम्प्लॉई
वॉइस ऑफ इंडिया चैनल की धांधली बदस्तूर जारी है। कंपनी अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों तक को नहीं बख्श रही है। महीनों सैलरी के लिए इंतजार नहीं करने को तैयार पत्रकारों ने वीओआई को इस्तीफा दिया तो उनके साथ प्रबंधन ने एग्रीमेंट (कोई और विकल्प प्रबंधन ने छोड़ा ही नहीं) का नाटक किया। मेहनताना जो बन रहा था उसके भुगतान के लिए कंपनी ने कर्मचारियों से जबरन मोहलत ले ली और पांच किश्तों में भुगतान का एग्रीमेंट हुआ।
नाराज कर्मचारियों के तेवर देख जैसे-तैसे कंपनी ने फरवरी माह के आखिर में पहली किश्त का भुगतान तो कर दिया लेकिन अब दूसरी किश्त के लिए फिर कर्मचारियों को चक्कर पे चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
कई दिनों तक वीओआई ऑफिस के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार अब कर्मचारी अदालत में जाने पर विचार कर रहे हैं। इस जंग में कई पत्रकार साथी शामिल हैं। कुछ साथी जो अब तक अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं वो भी अब अदालत का दरवाजा खटखटाने का इरादा कर चुके हैं।
आखिर कब तक प्रबंधन का झांसा चलता रहेगा?
आखिर कब तक लोग कंपनी की मनमानी झेलते रहेंगे?
आखिर कहीं तो होगी सुनवाई?
आखिर कभी तो मिलेगा इंसाफ?
वीओआई प्रबंधन के खिलाफ पत्रकार साथियों की इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना ही होगा और आप सभी से अपील है कि आवाज से आवाज मिलाएं।
आवाज दो लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आवाज दो लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, 1 अप्रैल 2009
शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2009
VOE- वॉइस ऑफ इम्पलॉइ-1
वॉइस ऑफ इंडिया में प्रबंधन की मनमानी जारी है। कई कर्मचारियों को नौकरी से जबरन निकाल दिया गया है। प्रबंधन की अपनी स्टाइल है और उस स्टाइल के तहत लोगों से इस्तीफा मांगा जा रहा है। इसमें काफी कुछ आपत्तिजनक है, लेकिन फिर भी सब कुछ बर्दाश्त किया जा रहा है।
प्रबंधन से अपील बस इतनी है कि वो कम से कम एक तार्किक तरीके से पेश आए।
- पहली अपील तो ये कि जिन लोगों को आप नौकरी से निकाल रहे हैं, उनका फौरन हिसाब करें। उन्हें फुल एंड फायनल का चेक फौरन सौंपा जाए।
- आखिर जिस शख्स की नौकरी जा रही है, वो क्यों एक, दो या चार महीने तक इंतजार करे? वो इंतजार भी कर सकता है लेकिन आप ऐसी शर्त कैसे किसी पर थोप सकते हैं?
- आपके संस्थान के माहौल से तंग आकर जो लोग नौकरी छोड़ गए हैं उनका फुल एंड फाइनल करने में आखिर इतनी देर क्यों की जा रही है?
- सुनने में आया है कि कुछ पत्रकार साथियों को वीओआई ऑफिस में घुसने से रोक दिया गया है। ये निहायत आपत्तिजनक है, इसका विरोध किया जाना चाहिए।
- हम जहां हैं वहीं से ऐसे तालिबानी रवैये का विरोध कर सकते हैं।
पत्रकार साथी जो हमेशा दूसरों के हितों की लड़ाई लड़ने का दंभ भरते हैं ऐसे मौकों पर क्यों गम खा जाते हैं?
ये लड़ाई किसी एक साथी की नहीं हम सभी की है.... कम से कम हम उन साथियों को अपना नैतिक समर्थन तो दे ही सकते हैं जो वीओआई प्रबंधन की मनमानी का शिकार हो रहे हैं।
प्रबंधन से अपील बस इतनी है कि वो कम से कम एक तार्किक तरीके से पेश आए।
- पहली अपील तो ये कि जिन लोगों को आप नौकरी से निकाल रहे हैं, उनका फौरन हिसाब करें। उन्हें फुल एंड फायनल का चेक फौरन सौंपा जाए।
- आखिर जिस शख्स की नौकरी जा रही है, वो क्यों एक, दो या चार महीने तक इंतजार करे? वो इंतजार भी कर सकता है लेकिन आप ऐसी शर्त कैसे किसी पर थोप सकते हैं?
- आपके संस्थान के माहौल से तंग आकर जो लोग नौकरी छोड़ गए हैं उनका फुल एंड फाइनल करने में आखिर इतनी देर क्यों की जा रही है?
- सुनने में आया है कि कुछ पत्रकार साथियों को वीओआई ऑफिस में घुसने से रोक दिया गया है। ये निहायत आपत्तिजनक है, इसका विरोध किया जाना चाहिए।
- हम जहां हैं वहीं से ऐसे तालिबानी रवैये का विरोध कर सकते हैं।
पत्रकार साथी जो हमेशा दूसरों के हितों की लड़ाई लड़ने का दंभ भरते हैं ऐसे मौकों पर क्यों गम खा जाते हैं?
ये लड़ाई किसी एक साथी की नहीं हम सभी की है.... कम से कम हम उन साथियों को अपना नैतिक समर्थन तो दे ही सकते हैं जो वीओआई प्रबंधन की मनमानी का शिकार हो रहे हैं।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)