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शुक्रवार, 26 दिसंबर 2008

माडर्न महाजन-२

अब एक बार फ़िर बात नए जमाने के महाजन और उसकी चालबाजियों की।
मैं एक क्रेडिट कार्ड अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक का इस्तेमाल कर रहा हूँ। नवम्बर महीने का बिल आया तो इंटरेस्ट देख कर मैं थोड़ा परेशान हो गया। बड़े ही मनमाने अंदाज में चार्ज किया गया था। मैंने ३ दिसम्बर को इंटरेस्ट कैलकुलेशन सीट के लिए फ़ोन किया जो मुझे कई बार फ़ोन करने के बाद १६ दिसम्बर को मिली। उसकी हार्ड कॉपी तो अभी तक नहीं मिली।
१- जिस मेल पते पर हर महीने बिल आता है, उसी पते पर इंटरेस्ट कैलकुलेशन सीट भेजने में इतनी देर की कोई वजह बैंक के पास नहीं है।
२- अभी तक हार्ड कॉपी भेजने की जहमत भी बैंक ने नहीं उठाई।
३- बैंक की ओर से ये जानने की कोशिश नहीं हुई की ग्राहक की समस्या दूर हुई या नहीं। बैलेंस भुगतान की रकम और तारीख याद दिलाने में इसी बैंक का कोई जोड़ आपको नहीं मिलेगा। तब आपका मेल पता, मोबाइल हर कुछ ये खुद ब ख़ुद ढूंढ लेते हैं।
४- मैंने इंटरेस्ट कैलकुलेशन सीट को लेकर कई सवाल उठाये लेकिन इसका कोई जवाब कस्टमर केयर अधिकारी के पास नहीं था। जैसे - किस रकम पर कितने दिन का इंटरेस्ट चार्ज किया गया है इसकी जानकारी बैंक ने नहीं दी।
५- आख़िर जो बिल ग्राहक को भेज दिया गया है उसकी इंटरेस्ट कैलकुलेशन सीट भेजने में इतनी देरी की वजह क्या है?
६- इंटरेस्ट कैलकुलेशन सीट में पूरा डिटेल क्यों नहीं दिया जाता?
कई बार फ़ोन करने और करीब ५०-६० रुपये फ़ोन पर खर्च करने के बाद मैंने ही कान पकड़ लिया।

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

मॉडर्न महाजन-१

काफी दिनों से इस पोस्ट को लेकर मंथन चल रहा था, आज आपसे शेयर कर ही लेता हूं।
मौजूदा दौर की मजबूरी कहिए या वक्त की जरूरत मैंने भी कुछ बैंकों के क्रेडिट कार्ड ले लिए हैं। हालांकि बार-बार मैं ये महसूस करता रहा हूं कि ये मॉर्डन महाजन पुराने महाजनों से ज्यादा खतरनाक हैं फिर भी इन कार्ड्स के जाल से बाहर नहीं निकल पा रहा हूं। पिछले दो-ढाई साल के दौरान कई ऐसे वाकये हुए जब मैंने इनसे तौबा करने की ठानी, लेकिन हमेशा टाल गया या ये कहूं कि टाल देना पड़ा। हालांकि आईसीआईसीआई का एक कार्ड मैं रद्द कर चुका हूं।
- इस कार्ड को रद्द करने का कारण भी बड़ा दिलचस्प है। चार-पांच महीनों पहले मैंने एक बार क्रेडिट कार्ड के बिल का नकद भुगतान किया। अगली बार के बिल में १०० रुपये अतिरिक्त जुड़ कर आ गए। मैंने कस्टमर केयर को फोन मिलाया तो जवाब बहुत रूखा था। सामने वाले सज्जन ने कहा कि ये रिजर्व बैंक का सर्कुलर है। बस मैंने भी ठान लिया कि इसे अब रद्द कर देना है। पैसे जमा कराया और एक कार्ड से मुक्ति मिल गई।
- रिजर्व बैंक का ये सर्कुलर भी कम दिलचस्प नहीं है। अलग-अलग बैंक इस सर्कुलर का अपने तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। आईसीआईसीआई क्रेडिट कार्ड के नकद भुगतान पर १०० रुपये वसूल रहा है, एचडीएफसी ५० रुपये तो एचएसबीसी इसके लिए कोई शुक्ल नहीं लेता। आखिर ये फर्क क्यों है?
ये मॉडर्न महाजनों का पहला फंडा है कि अपने मन से नियमों की व्याख्या करो और कस्टमर या ग्राहक के हर तर्क को खारिज कर दो। खारिज करने का तरीका भी बेहद आसान सा है... एक मशीन की तरह रटे-रटाए जवाब देते रहिए... ये सिस्टम जेनरेटेड है... ये आरबीआई का सर्कुलर है... ये हमारे बैंक का नियम है... आखिर आप क्या करेंगे?
मॉडर्न महाजन के इस दोहरे चरित्र पर बात और भी होगी... इस सीरीज में कुछ और बातें आपसे शेयर करूंगा... उम्मीद है कि ये सीरीज लंबी चलेगी।