बुधवार, 24 दिसंबर 2008

क्या-क्या सीखें ?

वो मेरे बॉस हैं
वो हमें सिखाते हैं
काम करने का तरीका
वो सिखाते हैं
कैसे आना है चुप-चाप ऑफिस
वो सिखाते हैं
कैसे करना है सैलरी का इंतज़ार ?

वो सिखाते हैं
सवाल नहीं करने की अदा
लेकिन हम ही हैं
नालायक, गरीब और लाचार
समझ नहीं पाते
उनकी अकलमंदी की ये सारी बातें ...
हमें इतना कुछ सिखाने वाले बॉस
क्या ये सब मालिकों से सीख कर आते हैं ?
क्या इन्हें सदियों पुरानी
कहावत भी याद नहीं आती
भूखे पेट भजन न होई रे 'लाला'।

1 टिप्पणी:

आदर्श राठौर ने कहा…

जय हो.....................
और कोई शब्द नहीं सूझ रहा...